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सीआरपीसी की धारा 41ए का पालन किए बिना आरोपी को गिरफ्तार करने पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की खिंचाई की

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सुनील फर्नांडीस ने प्रस्तुत किया कि जांच अधिकारी ने सीआरपीसी, 1973 की धारा 41 (ए) के तहत कोई नोटिस नहीं दिया। उन्होंने आगे प्रस्तुत किया कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी से पहले सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जांच अधिकारी (आईओ) ने याचिकाकर्ता से संपर्क किया और उसे 8 मार्च, 2022 को हिरासत में ले लिया। वकील के तर्क को ध्यान में रखते हुए और याचिकाकर्ता पहले से ही हिरासत में होने पर विचार करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता को नियमित जमानत आवेदन दायर करने की स्वतंत्रता दी। पीठ ने अपने आदेश में कहा, "यदि ऐसा कोई आवेदन दायर किया जाता है तो ट्रायल कोर्ट से यह अपेक्षा की जाती है कि वह सीआरपीसी की धारा 41 (ए) के गैर-अनुपालन पर ध्यान दे और याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर गिरफ्तारी के बाद की जमानत के लिए आवेदन का जितनी जल्दी हो सके एक उचित समय में निपटारा करे।"

क्या पति पर धारा 377 आईपीसी के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, जब धारा 375 आईपीसी वैवाहिक यौन संबंध से छूट देती है? दिल्ली हाईकोर्ट विचार करेगा

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दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत एक पति पर पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध के अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है, जब धारा 375 का अपवाद 2 वैवाहिक यौन संबंध को बलात्कार के अपराध से छूट देता है। हाईकोर्ट ने उक्त याचिका को याचिकाओं के एक बैच से अलग कर दिया है, जिनमें वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण की मांग की गई थी। जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस सी हरिशंकर की खंडपीठ ने कई दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद संहिता की धारा 375 के अपवाद के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिका को याचिकाओं के उक्त बैच से अलग करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह 11 मार्च को इसे सूचीबद्ध करते हुए मामले की अलग से सुनवाई करेगा। "चूंकि उपर्युक्त याचिका में उठाया गया मुद्दा रिट याचिकाओं के समूह यानी WP (C) Nos. 284/2015, 5858/2017, 6024/2017 और WP (Crl.) No.964/2017 से गुणात्मक रूप से अलग है। उस याचिका को इस बैच से अलग करने का आदेश दिया जाता है। इस रिट याचिका पर अलग से सुनवाई की जाएगी।" एडवोकेट अमित कुमार की ओर से...

शराब की एमआरपी पर छूट पर रोक लगाने वाले दिल्ली सरकार के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती

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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में एक याचिका दायर कर दिल्ली सरकार द्वारा शहर में शराब के एमआरपी पर खुदरा लाइसेंसधारियों द्वारा छूट या रियायतें देने पर रोक लगाने के आदेश को चुनौती दी गई है। एडवोकेट संजय एबॉट, एडवोकेट तन्मया मेहता और एडवोकेट हनी उप्पल के माध्यम से दायर याचिका दिल्ली सरकार के उत्पाद, मनोरंजन और विलासिता कर विभाग द्वारा पारित 28 फरवरी, 2022 के आदेश को चुनौती देती है। वैध L7Z लाइसेंस रखने वाले पांच निजी खिलाड़ियों द्वारा याचिका दायर की गई है। याचिका पिछले साल जून में दिल्ली सरकार द्वारा वर्ष 2021-2022 के लिए अनुमोदित नई दिल्ली आबकारी नीति की पृष्ठभूमि में दायर की गई है। यह नीति शराब व्यवसाय से संबंधित विभिन्न पहलुओं के लिए रूपरेखा निर्धारित करती है। आबकारी नीति को मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली सरकार ने भारतीय और विदेशी शराब के खुदरा विक्रेताओं के लिए जोनल लाइसेंस के लिए निविदाएं जारी की थीं। याचिकाकर्ताओं ने निविदाओं में भाग लिया और शहर के विभिन्न क्षेत्रों के लिए सफल बोलीदाताओं के रूप में उभरे। याचिका में कहा गया है कि छूट की अनुमति दी गई थी और लाइसेंसधारक छूट दे रहे थे। ...

section 307 IPC

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_*⭐SC:Intention matters in a case of attempt to murder - Indian Penal Code, 1860 - Section 307.*_ _Proof of grievous or life-threatening hurt not a sine qua non for the offence u/s 307 Intention of the accused is important which can be ascertained from the actual injury and surrounding circumstances including nature of weapon used and severity of blows inflicted - Instantly eleven punctured wounds caused by a firearm - Circumstances of the case indicating an intention to murder - section 307 held applicable ._ _Case:_  _*The State of Madhya Pradesh Vs. Kanha @ Omprakash.*_ _Citation:_ _*2019 (6) SC 468: Cri 1589 (2018): SLP 1433 (2013).*_ *************************** Advocate & solicitor 8851250058  Best advocate in rohini court for divorce case | best lawyer for divorce case in rohini court | rohini court advocate contact number | best property lawyer in rohini court | property lawyer in rohini court | best cheque bounce lawyer in rohini court | best advocate f...