क्या पति पर धारा 377 आईपीसी के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, जब धारा 375 आईपीसी वैवाहिक यौन संबंध से छूट देती है? दिल्ली हाईकोर्ट विचार करेगा

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत एक पति पर पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध के अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है, जब धारा 375 का अपवाद 2 वैवाहिक यौन संबंध को बलात्कार के अपराध से छूट देता है।
हाईकोर्ट ने उक्त याचिका को याचिकाओं के एक बैच से अलग कर दिया है, जिनमें वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण की मांग की गई थी। जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस सी हरिशंकर की खंडपीठ ने कई दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद संहिता की धारा 375 के अपवाद के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
याचिका को याचिकाओं के उक्त बैच से अलग करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह 11 मार्च को इसे सूचीबद्ध करते हुए मामले की अलग से सुनवाई करेगा।
"चूंकि उपर्युक्त याचिका में उठाया गया मुद्दा रिट याचिकाओं के समूह यानी WP (C) Nos. 284/2015, 5858/2017, 6024/2017 और WP (Crl.) No.964/2017 से गुणात्मक रूप से अलग है। उस याचिका को इस बैच से अलग करने का आदेश दिया जाता है। इस रिट याचिका पर अलग से सुनवाई की जाएगी।"
एडवोकेट अमित कुमार की ओर से दायर याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या धारा 375 में 2013 का संशोधन कानूनी रूप से विवाहित नागरिकों के लिए धारा 377 के साथ असंगत है। 2013 के संशोधन के बाद बलात्कार के अपराध के दायरे का विस्तार किया गया है, जिसमें लिंग-योनि के अलावा अन्य मर्मज्ञ कृत्यों (penetrative acts) को भी शामिल किया गया है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि इसलिए जब धारा 375 का अपवाद 2 वैवाहिक यौन संबंध को बलात्कार के अपराध के दायरे से बाहर करता है तो धारा 377 आईपीसी के तहत नॉन वैजिनल पेनेट्रेट‌िव सेक्सुअल एक्ट के लिए पति पर मुकदमा चलाना असंगत है।
याचिकाकर्ता पर पत्नी के साथ कथित रूप से बिना सहमति के गुदा मैथुन के आरोप में आईपीसी की धारा 377 के अपराध के लिए मुकदमा चलाया जा रहा है। उसका तर्क है कि जब एक ही अधिनियम को धारा 375 आईपीसी के तहत छूट दी गई है तो धारा 377 आईपीसी के तहत मुकदमा चलाने योग्य नहीं है।
यह तर्क देते हुए कि धारा 375 में संशोधन के बाद, देश का दंड कानून अनिश्चित हो गया है, याचिका में एक घोषणा की मांग की गई है कि पत्नी के साथ "अप्राकृतिक" यौन संबंधों के लिए पुरुष पर मुकदमा चलाना असंवैधानिक है।

Advocate in Delhi high court Advocate Kuldip singh  Mob:8851250058 www.advocatesera.com

 

Comments

Popular posts from this blog

Order 9 Rule 13 and Order 5 r/w Section 115 CPC

Sections 340 read with Section 195 CRPC

Section 313 CRPC